लड़की को ही नहीं , एक लड़के को भी अपना घर छोड़ना पड़ता है - Two Liner Hindi Poetry

Written By: Ram Bisai

Saturday, June 26, 2021

लड़की को ही नहीं , एक लड़के को भी अपना घर छोड़ना पड़ता है

ज़िन्दगी में गिर गिर कर संभलना पड़ता हैं,

हर तक़लीफ़ से लड़ना पड़ता है,

जब घर में हो परेशानी, तो अपने ख़्वाइसो को मारना पड़ता हैं

चंद रुपया कमाने के लिए, एक लड़के को भी अपना घर छोड़ना पड़ता हैं,

माँ का लाड़ पापा का प्यार से दूर रहना पड़ता है,

दूर रहकर आसुंओं से अपना पेट भरना पड़ता है,

चंद रुपया कमाने के लिए , एक लड़के को भी अपना घर छोड़ना पड़ता हैं,

ज़िन्दगी में हर गम हँस कर सहना पड़ता है,

गर पूछे कोई हाल तो, मैं ठीक हूँ यही कहना पड़ता है,

ना जाने ज़िन्दगी में क्या क्या करना पड़ता हैं,

चंद रुपया कमाने के लिए, एक लड़के को भी अपना घर छोड़ना पड़ता हैं,

No comments:

Post a Comment