ऐ दोस्त.. - Two Liner Hindi Poetry

Written By: Ram Bisai

Saturday, July 31, 2021

ऐ दोस्त..

 ऐ दोस्त..

हम इतनी जल्दी क्यों बड़े हो गए,


अपने पैरों पर क्यों खड़े हो गए,


कितना खूबसूरत था वो मंजर अपना,

ना था कोई गम, ना था कुछ पाने का सपना,


नदी के उस पार से, छलांग लगाकर आये थे,

मन में लिए डर, और कंधे पर बैग टांगकर आये थे,


पहली बार तूने ही दोस्ती का हाथ बढ़ाया था,

और मुझे गले से लगाया था,


पहले तो बेवजह ही मुलाकात किया करते थे,

नुक्कड़ पर चाय सब साथ पिया करते थे,


अब कन्हा पहले की तरह मुलाक़ात होती

सिर्फ ऑनलाइन पे ही अब बात होती हैं


तूने ही तो ज़िन्दगी का अहेमियत बताया है मुझे,

हर तक़लीफ़ से लड़ना भी सिखाया हैं मुझे,


तेरे होते हुए मेरे अंसुओं को, पोछना नहीं पड़ता मुझे,

एक तू ही हैं, जिसे कुछ कहने से पहले  सोचना नहीं पड़ता मुझे,


तेरे साथ वो पल बिताना, मेरे लिए कितना खाश होता है,

मुझे हो कोई तकलीफ तो, तू भी कितना परेशान होता हैं,


वक़्त के साथ साथ अब दूरियां बढ़ गयी है,

क्योंकि अब थोड़ी जिम्मेदारियों का बोज कंधों पर पड़ गयी है,

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