वो मेरे हमसफ़र - Two Liner Hindi Poetry

Written By: Ram Bisai

Wednesday, July 21, 2021

वो मेरे हमसफ़र


 वो मेरे हमसफ़र

मेरे ज़िन्दगी में तुम आने से पहले

मुझे अपना तुम बनाने से पहले


बस इतना सा जान लेना तुम

मेरे इन बातों को थोड़ा मान लेना तुम 


वही करना जो मर्जी हो तेरे

बस तू मां को हमेशा खुश रखना, मेरे,


तेरा हर दुख दर्द में झेलूंगा,

तेरे साथ हर खेल भी खेलूंगा


मां के कामो में कभी हाथ तो  बटाया नही,

मगर तेरे लिए मैं रोटीयां भी बेलूँगा....


जो तुझे पसंद ना हो, वो कभी मैं करूँगा नहीं

बेवज़ह मैं तुझसे, कभी लड़ूंगा नहीं


कभी तमको आये गुस्सा तो, गुस्सा मुझपे झाड़ देना तुम

मगर मेरे मां को, बहुत प्यार देना तुम


कभी हो जाये कोई गलती तो, तुम माफ कर देना,

रह जाए कोई बात दिल मे, दिल से उसे तुम साफ कर देना,


तेरा हर ज़िद हर नखरे सहूंगा मैं,

कभी गुस्से में, कुछ नहीं कहूंगा मैं


पहाड़ नहीं , पहाड़ की चोटी बनना तुम

मेरे मां की बहू नहीं , एक बेटी बनना तुम,


जिनती भी बार हो गलती तुमसे, मेरे तरफ से तुमको माफी हैं,

मेरे मां को खुश रखना, मेरे लिए बस इतना ही काफी है


इस दुनिया के लोगों को,  एक पाठ सीखाना तुम ,

बहु बेटी भी बन सकती हैं, बस यह कर दिखाना तुम..


 वो मेरे हमसफ़र

मेरे ज़िन्दगी में तुम आने से पहले

मुझे अपना तुम बनाने से पहले


बस इतना सा जान लेना तुम

मेरे इन बातों को थोड़ा मान लेना तुम 

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