Two Liner Hindi Poetry

Written By: Ram Bisai

Saturday, July 31, 2021

ऐ दोस्त..

›
 ऐ दोस्त.. हम इतनी जल्दी क्यों बड़े हो गए, अपने पैरों पर क्यों खड़े हो गए, कितना खूबसूरत था वो मंजर अपना, ना था कोई गम, ना था कुछ पाने का सपना...
1 comment:
Wednesday, July 21, 2021

वो मेरे हमसफ़र

›
 वो मेरे हमसफ़र मेरे ज़िन्दगी में तुम आने से पहले मुझे अपना तुम बनाने से पहले बस इतना सा जान लेना तुम मेरे इन बातों को थोड़ा मान लेना तुम  वही ...
3 comments:
Saturday, June 26, 2021

लड़की को ही नहीं , एक लड़के को भी अपना घर छोड़ना पड़ता है

›
ज़िन्दगी में गिर गिर कर संभलना पड़ता हैं, हर तक़लीफ़ से लड़ना पड़ता है, जब घर में हो परेशानी, तो अपने ख़्वाइसो को मारना पड़ता हैं चंद रुपया कमाने के...
Tuesday, June 23, 2020

I MISS YOU PAPA

›
आपके ना रहने का ख्याल ही, आज मुझे सता रही हैं, पापा आज आपकी याद, मुझे बहुत आ रही है, "क्योंकि" मेरे चेहरे का नूर थे आप, मेरे ...
1 comment:
Saturday, August 17, 2019

हमारी गलियों में आना छोड़ दो

›
कुबूल करता हूँ गलती अपनी, अब तो तुम मुझे रुलाना छोड़ दो.. अपनी इन नशीली आँखों से हर किसी को जाम पिलाना छोड़ दो.. मैं भी भूल जाऊंगा तुमको तु...
Wednesday, July 31, 2019

फिर भी लव यू बोला करती थी...

›
मैं जब भी उसे मिलने को कहता था, वो कल पे टाल दिया करती थी, प्यार तो था नहीं, फिर भी लव यू बोला करती थी...

मेरे पास अब कुछ देने को बचा भी नहीं...

›
जख्म बढ़ते जा रहे हैं, पुरानो पे अभी मरहम लगा भी नही, ये ज़िन्दगी बता तुझे क्या चाहिए, मेरे पास अब कुछ देने को बचा भी नहीं..
›
Home
View web version
Powered by Blogger.